Monday, June 22, 2026

Why modi asked not to buy gold?

 

Why modi asked not to buy gold?

Why modi asked not to buy gold? In English (10 Points)

  1. PM Modi appealed to not buy gold for one year to save foreign exchange (dollars), as India is the second-largest gold importer and pays in dollars.

  2. Only 17 designated banks in India are allowed to import gold from abroad (Dubai, Switzerland, etc.).

  3. These banks don't sell directly to jewellers; they sell to a cartel of only 50-60 big bullion dealers based in South Mumbai.

  4. This syndicate controls the gold price, supply, and premium across India, and allegedly funnels profits to certain political families.

  5. Due to PM's appeal, monthly gold trade crashed from ₹14,000 crore to around ₹1,000 crore, putting massive financial pressure on the syndicate.

  6. The government is launching the India International Bullion Exchange in GIFT City to bypass this cartel and make the market democratic and competitive.

  7. Earlier, gold rates were decided by the London Bullion Exchange; now India will set its own domestic gold rates based on local demand and supply.

  8. To avoid a Russia-like asset seizure, India is repatriating its gold kept abroad (Bank of England, Switzerland); 104 tonnes were brought back in March 2026.

  9. Domestic gold mining is being boosted, with new reserves found in Andhra Pradesh, Karnataka, Jabalpur, and Jamui (Bihar).

  10. This move is like a "second demonetization" — it aims to break the political-financial syndicate running on black money from gold, making the system transparent.


Why modi asked not to buy gold? In Hindi (10 Points)

१. पीएम मोदी ने एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की, क्योंकि भारत सबसे बड़ा सोना आयातक है और डॉलर में भुगतान करता है, जिससे रुपये पर दबाव बनता है।

२. भारत में सिर्फ १७ बैंकों को ही विदेशों (दुबई, स्विट्ज़रलैंड) से सोना आयात करने की अनुमति है।

३. ये बैंक सीधे जौहरियों को नहीं बेचते, बल्कि सिर्फ ५०-६० बड़े बुलियन डीलरों (जो साउथ मुंबई में बैठते हैं) को बेचते हैं।

४. ये ५०-६० लोग मिलकर एक सिंडिकेट (कार्टेल) चलाते हैं, जो पूरे देश में सोने की कीमत और सप्लाई को नियंत्रित करता है और इसका मुनाफा कुछ राजनीतिक परिवारों को जाता है।

५. पीएम की अपील के कारण सोने का मासिक कारोबार ₹१४,००० करोड़ से गिरकर ₹१,००० करोड़ पर आ गया, जिससे इस सिंडिकेट पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है।

६. सरकार गिफ्ट सिटी में 'इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज' शुरू कर रही है, ताकि इन ५०-६० डीलरों को बायपास करके अधिक प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी बाजार बनाया जा सके।

७. अब तक सोने का दर लंदन बुलियन एक्सचेंज तय करता था, लेकिन अब भारत अपनी मांग और सप्लाई के हिसाब से अपना घरेलू दर तय करेगा।

८. रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद उसकी संपत्ति जब्त कर ली गई, इसलिए भारत सरकार अपना विदेशों (इंग्लैंड और स्विट्ज़रलैंड) में रखा सोना वापस भारत ला रही है; मार्च २०२६ में १०४ टन सोना वापस लाया गया।

९. विदेशी आयात कम करने के लिए भारत में सोने का खनन बढ़ाया जा रहा है; आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, जबलपुर और बिहार के जमुई में नए भंडार मिले हैं।

१०. यह कदम 'दूसरा विमुद्रीकरण' (demonetization) जैसा है—इसका उद्देश्य सोने के काले धन पर चलने वाली राजनीतिक-आर्थिक गठजोड़ को तोड़ना और पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाना है।


Why modi asked not to buy gold? 10 lines in Marathi:


१. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी यांनी एका वर्षासाठी सोने न खरेदी करण्याचे आवाहन केले, कारण भारत मोठ्या प्रमाणात सोने परदेशातून (डॉलरमध्ये) आयात करतो आणि रुपयाला आधार देण्यासाठी डॉलरची बचत करणे गरजेचे आहे.

२. भारतात सोने आयात करण्याचा अधिकार केवळ १७ बँकांना आहे आणि या बँका ते सोने थेट दागिने व्यापाऱ्यांना न देता मुंबईतील ५०-६० मोठ्या घाऊक व्यापाऱ्यांना विकतात.

३. हे ५०-६० व्यापारी मिळून एक सिंडिकेट (कार्टेल) चालवतात, जे देशभरात सोन्याची किंमत आणि पुरवठा नियंत्रित करतात आणि त्यातून मिळणारा नफा काही राजकीय कुटुंबांना निधी देण्यासाठी वापरला जातो.

४. पंतप्रधानांच्या आवाहनामुळे सोन्याचा मासिक व्यापार १४,००० कोटींवरून सुमारे १,००० कोटींवर आला आहे, ज्यामुळे या सिंडिकेटकडे मोठा साठा अडकून पडला आहे आणि त्यांची आर्थिक अडचण वाढली आहे.

५. या संधीचा फायदा घेत सरकार गिफ्ट सिटीमध्ये 'इंडिया इंटरनॅशनल बुलियन एक्स्चेंज' सुरू करत आहे, ज्यामुळे हे ५०-६० व्यापारी बायपास होतील आणि अधिक स्पर्धात्मक बाजारपेठ निर्माण होईल.

६. आतापर्यंत सोन्याचा दर लंडन बुलियन एक्स्चेंजवर ठरत असे, परंतु आता भारत आपल्या देशातील मागणी आणि पुरवठ्यानुसार सोन्याचा दर ठरवू शकेल.

७. रशियावर निर्बंध आल्यानंतर त्यांची मालमत्ता जप्त केली गेली, त्यामुळे भारत सरकार आपले परदेशात (इंग्लंड व स्वित्झर्लंड) ठेवलेले सोने परत भारतात आणत आहे; २०२६ मध्ये १०४ टन सोने आणले गेले.

८. परदेशातून सोने आयात करण्याऐवजी भारतातच सोन्याचे उत्खनन वाढवले जात आहे; आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, जबलपूर आणि बिहारच्या जमुईमध्ये मोठ्या सोन्याच्या साठ्याचा शोध लागला आहे.

९. 'राजेश एक्स्पोर्ट्स' या कंपनीने स्वित्झर्लंडमधील सोन्याचा साठा दाखवून आपली किंमत १५ लाख कोटी दाखवली आणि त्यावर बँकांकडून कर्ज घेतले—हा वित्तीय गैरव्यवहार उघडकीस आला.

१०. एकूणच, पंतप्रधानांचे हे पाऊल 'दुसरे रद्दीकरण' (demonetization) सारखे आहे, ज्यामुळे सोन्याच्या काळ्या पैशावर चालणारी राजकीय-आर्थिक यंत्रणा उद्ध्वस्त होईल आणि सोन्याची बाजारपेठ अधिक पारदर्शी व लोकशाही बनेल.


सोने का खेल और एक चुपचाप क्रांति

(एक दिलचस्प कहानी)


सुबह के ५ बज रहे थे। मुंबई के साउथ मुंबई के एक पुराने इमारत के तीसरे मंजिल पर बैठे थे—मिस्टर शर्मा। उम्र करीब ६० की, नाम नहीं पता, पता था सिर्फ इतना कि वो उन ६० लोगों में से एक थे, जो तय करते हैं कि देश में सोना किस दाम पर बिकेगा।

उनके सामने तीन मोबाइल फोन रखे थे। एक दुबई से बात कर रहा था, दूसरा लंदन से और तीसरे पर उनके 'प्रायोजक' थे—वो लोग जिन्हें वो कभी नाम से नहीं बुलाते थे। बस "साहब" कहकर पुकारते थे। साहब दिल्ली में बैठते थे, कभी किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी के ऑफिस में, कभी किसी मंत्री के बंगले में।

"आज का दर?" शर्मा ने फोन पर पूछा।

"लंदन में ८५ हजार है, लेकिन भारत में हम ९० हजार रखेंगे," दूसरी तरफ से आवाज आई। "प्रीमियम हमारा है, बाकी सब हमारा है।"

शर्मा मुस्कुराए। उनके पास करीब ५० करोड़ रुपये का सोना पड़ा था। बैंक से कर्ज लेकर खरीदा था। अगले हफ्ते कीमत बढ़ानी थी, बाजार में उछाल लाना था—तेल की कीमत बढ़ेगी, डॉलर मजबूत होगा, लोग दहशत में सोना खरीदेंगे, और वो अमीर बन जाएंगे।

यही था खेल। दशकों से चला आ रहा था—सोना, पैसा, सियासत, अंडरवर्ल्ड। सब जुड़ा हुआ था।




फिर एक दिन टीवी पर पीएम मोदी का भाषण आया—

"एक साल सोना मत खरीदो।"

शर्मा हँसे। "ये क्या बकवास कर रहे हैं?" उन्होंने अपने साथी से कहा। "लोग रुकेंगे? भारतीय औरत सोना खरीदना बंद करेगी? कभी नहीं।"

लेकिन हुआ उल्टा।

पहले महीने ही कारोबार १४,००० करोड़ से गिरकर १०,००० करोड़ पर आ गया। शर्मा की बेचैनी बढ़ी। तीसरे महीने कारोबार १,००० करोड़ पर आ गया। उनका सोना पड़ा रहा, बिका नहीं। बैंक ने फोन किया—"सर, ब्याज चुकाओ।"

"दो हफ्ते और दो," शर्मा ने कहा।

लेकिन दो हफ्ते गुजरे, फिर दो महीने, फिर छह महीने। सोना सड़ता रहा। दिल्ली से फोन आया—"क्या हो रहा है? हमें तो पैसा चाहिए, विधानसभा चुनाव आ रहे हैं।"

शर्मा को पसीना आ गया। पहली बार उन्हें लगा—ये बंदा खेल खत्म कर रहा है।


फिर खबर आई— गिफ्ट सिटी में भारत का अपना बुलियन एक्सचेंज खुल रहा है। अब कोई भी व्यापारी सीधे वहाँ से सोना खरीद सकता है। १७ बैंकों और ६० डीलरों की ज़रूरत नहीं। दरें पारदर्शी होंगी। कोई "प्रीमियम" नहीं, कोई सिंडिकेट नहीं।

शर्मा ने टीवी बंद कर दिया।

और फिर एक और खबर—भारत विदेशों से अपना सोना वापस ला रहा है। मार्च २०२६ में १०४ टन सोना वापस आया। रूस के साथ जो हुआ (पश्चिमी देशों ने उनकी संपत्ति जब्त कर ली), वैसा भारत के साथ न हो।

एक और खबर—जमुई (बिहार) में २२२ करोड़ टन सोना मिला, आंध्र, कर्नाटक, जबलपुर में खनन तेज़ हुआ।


अब शर्मा के सामने तीन रास्ते थे—या तो वो ईमानदारी से काम करें, या विदेश भाग जाएं (जैसे नीरव मोदी, विजय माल्या), या दिवालिया हो जाएं।

उन्होंने तीसरा रास्ता चुना। उनका सोना नीलाम हो गया। बैंक ने उनकी कोठी जब्त कर ली। दिल्ली वालों ने दूसरा सहारा ढूंढा, लेकिन इस बार कोई नहीं मिला क्योंकि एक्सचेंज ने सबको खुली बाजार दी।

शर्मा आज किसी किराए के मकान में रहते हैं।

और वो इमारत जहाँ वो बैठते थे... अब वहाँ स्टार्टअप्स के ऑफिस हैं। युवा लैपटॉप खोले बैठे हैं—डिजिटल गोल्ड ट्रेड कर रहे हैं, पारदर्शी दरों पर, बिना किसी माफिया के।

वो इमारत अब सोने के सिंडिकेट की नहीं, नई भारत की कहानी कहती है।

कहानी खत्म? नहीं, अभी शुरू हुई है।

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