Wednesday, December 9, 2015

Mulvyadh upchar in hindi



मेरा मुझमे कुछ नहीं,
जो कुछ है सो तेरा।
तेरा तुझको सौंपते,
क्या लागे है मेरा।।

साधू-संतों और सद्गुरुओं से प्राप्त ज्ञान उन्ही की सेवा में समर्पित है। दुखी मानवता की सेवा ही उनकी सच्ची सेवा है और उनके अमृत वचनों व् लोकहितकारी अनुभवों का प्रचार-प्रसार ही उनके प्रति ह्रदय से अभिव्यक्त भावपूर्ण श्रद्धांजली है। सन १९९५ की बात है, उस समय सर्दी का मौसम था। आश्रम में आये कुछ साधुओं के साथ बैठकर चाय पीने के साथ साथ आध्यात्मिक चर्चा भी चल रही थी। आश्रम के कुछ शिष्य भी भगवद चर्चा का आनंद उठा रहे थे।

कुछ कार्य से कमरे के बाहर आया तो मेरी निगाह बेंच पर बैठी आश्रम में अक्सर आने वाली एक युवती पर पड़ी, जो मुझसे मिलने की प्रतीक्षा कर रही थी। चेहरे से बहुत उदास और दुखी लग रही थी। मैंने हालचाल पूछा तो रोने लगी। कई बार रोने का कारण पूछने पर बहुत संकोच और शर्म के साथ मुझे बताई कि उसे खूनी बवासीर है और तीन दिन से रक्तस्राव हो रहा है।

मैंने उससे पूछा, ‘डॉक्टर को दिखाई की नही। कुछ दवा ली।’ उसने कहा, ‘होम्योपैथी और अंग्रेजी दोनों दवा ली हूँ, पर कोई फायदा नहीं।’ हमलोग बातचीत कर ही रहे थे कि एक साधू कमरे से बाहर निकले और हमारे करीब आ बोले, ‘बेटी घबरा मत। इस रोग की एक रामबाण दवा है। दवा यहांपर मौजूद भी है। तू जा एक पाँव दही ले के आ।’ युवती दही लेने जाने लगी तो मैंने उसे रोका, क्योंकि थोड़ा दूर जाना था। एक शिष्य को दही लाने के लिए भेज दिया। मुझे यह जानने की उत्सुकता थी कि आश्रम में खूनी बवासीर की रामबाण अौषधि है कहाँ?

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दवा बताने वाले साधू उस बोरे की तरफ बढे, जिसमे आम की लकड़ी हवन के लिए रखी हुई थी। लकड़ी के ऊपर पानी वाले नारियल का खेझुरा यानि जटा रख हुआ था। अक्सर ही यज्ञ होते रहने के कारण नारियल की काफी जटा इकट्ठी हो गई थी, जो हवनकुंड में आम की लकड़ी को सुलगाने के काम आती थी। वो साधु कुछ सुखी जटा ले उसे उसे अच्छी तरह से जलाये, फिर उसे ठंडाकर खूब बारीक पिसे। एक मिटटी के पुरवा में एक पाँव दही आ गई। साधू महोदय एक चम्मच जटा की राख दही में अच्छी तरह से मिलाये और युवती को उसे खाने को कहे।

युवती ने उस दही को खा लिया। एक कागज में दो चम्मच जटा की राख बाँध साधू महाशय युवती को थमाते हुए बोले, ‘बेटी, इस दवा को आज रात तक इसी तरह से दही में मिलाकर दो बार और खा लेना। दवा बस आज ही तीन बार लेना, फिर मत लेना।’ दवा लेकर युवती चली गई और हमारी अधूरी आध्यात्मिक चर्चा फिर शुरु हो गई। अगले दिन वो युवती आश्रम में आई तो बेहद खुश थी। दवा काम कर गई थी।

बहुत से लोंगो को ये दवा मैंने बताई और उन्हें लाभ भी की। कुछ लोग जो बवासीर की बहुत गंभीर अवस्था में थे, उन्हें कम लाभ हुआ। मैंने उन्हें बिना देरी किये डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी। इस आयुर्वेदिक दवा के बारे में बाद में और भी बहुत से लोंगो के मुंह से सुना। कुछ लोगों ने बताया कि एक गिलास (गिलास शीशे का हो तो ज्यादा बेहतर होगा) छाछ में एक चम्मच नारियल की जली हुई जटा की खूब बारीक पिसी राख मिला सुबह खाली पेट लेने से नई या पुरानी खूनी बवासीर में बहुत जल्दी फायदा मिलता है।

दवा जल्दी और ज्यादा असर करे, इसके लिए ये जरुरी है कि दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ नहीं खाया पीया जाये। बाकी समय आप खाए पियें, परन्तु ध्यान रखें कि ज्यादा घी तेल वाली तली भुनी हुई चीजें, बेसन, मैदा और बैंगन की सब्जी व उड़द की दाल आदि न खाएं। बवासीर में सूरन की सब्जी चोकर वाले आंटे की रोटी के साथ खाएं, बहुत लाभ मिलेगा। बवासीर का मूल कारण कब्ज है।

भारत जैसे देश में, जहाँपर सार्वजनिक जगहों पर या बहुत से गाँवों में अभी भी शौचालय की सुबिधा का अभाव है, वहांपर लोंगो खासकर महिलाओं द्वारा मलत्याग की इच्छा को मज़बूरी में दबाने के कारण भी बवासीर रोग हो जाता है। ये छूत का रोग भी है। ऐसे रोगियों के मल पर मलत्याग और उनके मूत्र पर मूत्रत्याग नहीं करना चाहिए। परिवार में किसी को बवासीर है और यदि शौचालय की अच्छी तरह से साफ़ सफाई नहीं रखी जाएगी तो परिवार के दूसरे लोंगो को भी ये रोग हो सकता है।

जिन्हे कब्ज रहती है, पेट साफ़ नहीं होता है, उन्हें मैथीदाना १०० ग्राम, अजवाइन ५० ग्राम और काली जीरी २५ ग्राम लेकर खूब बारीक चूर्ण बना उन्हें मिलाकर शीशी में रख लेना चाहिए और रात को सोते समय आधा चम्मच यानि तीन ग्राम चूर्ण गर्म पानी के साथ लेना चाहिए। 

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अपने साधना काल के दौरान बारह वर्षों तक बहुत देर तक एक ही आसन में बैठने और खाने-पीने की अनियमित दिनचर्या के कारण सन २००३ में मुझे खुजली और मस्से वाले बवासीर हो गई थी। आश्रम में आने वाले कई डॉकटरों से सलाह लिया, अंग्रेजी और होम्योपैथी की बहुत सी दवाएं खाईं, पर कोई फायदा नहीं हुआ। अंत में मैंने अपने एक पूज्य गुरुदेव से इस बात की चर्चा की, उन्होंने रोज सुबह खाली पेट एलोविरा का जूस निकालकर पीने और उसका गुदा मस्से पर लगाने की सलाह दी। तीन-चार महीने के बाद मुझे उस खुजली और मस्से वाली बवासीर से छुटकारा मिल गया।

एक सज्जन फिशर यानि गुदामुख की त्वचा के फटने व घाव होने से पीड़ित थे। शौचालय में जाते तो दर्द के मारे बच्चों की तरह से जोर जोर से रोने लगते थे। मैंने उन्हें एलोविरा जूस पीने और एलोविरा जेल लगाने की सलाह दी। अब वो ठीक हैं और मुलाक़ात होने पर धन्यवाद देते नहीं थकते हैं। एलोविरा का आप गुदा निकाल लें या फिर बाबा रामदेव वाली दूकान से बिना केमिकल वाली शुद्ध एलोविरा जेल लें लें। मस्से पर एलोविरा जेल लगाने से पहले अपने नाख़ून जरूर काट लेना चाहिए। रोग यदि न ठीक हो तो किसी अच्छे डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

आज भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की बहुत बड़ी आबादी बवासीर रोग से ग्रस्त है। लोगों को इस रोग से छुटकारा दिलाने के लिए एक सरकारी मुहीम चलनी चाहिए। सरकारी मुहीम तो जब चलेगी, तब चलेगी। फिलहाल आइये हम लोग ही मिल के बवासीर रोग भगाने की एक मुहीम चलायें। आप सभी कृपालु पाठकों की अनमोल प्रतिक्रिया और इस रोग को दूर भगाने वाले उपयोगी अनुभवों का स्वागत है।

 खून के साथ मांस निकलता दिखाई देता है। क्या यह बवासीर हो सकता है? पिछले सात साल से यह परेशानी है।
- एक पाठक

ये पाइल्स हो सकते हैं। रेक्टल प्रोलैप्स भी हो सकता है। ऐसे लक्षणों में कैंसर की आशंका भी होती है, लेकिन चूंकि समस्या सात साल से है इसलिए कैंसर नहीं हो सकता।किसी सीनियर सर्जन से जांच कराएं।

मुझे मल त्याग के दौरान समस्या होती है, लेकिन यह नहीं पता कि ये पाइल्स हैं या फिशर। एक डॉक्टर कहता है कि यह फिशर है। दूसरे को दिखाया तो उसने कहा कि ये पाइल्स हैं और ऑपरेशन होगा। दोनों ने ही देखकर जांच नहीं की। क्या करूं ?
- पंकज कुमार

लगता है आप किसी झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंच गए क्योंकि बिना जांच किए यह कहना मुश्किल है कि ये पाइल्स हैं या फिशर। किसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जन से मिलें। वह जांच करने के बाद सही राय देंगे।

मुझे 10 साल पहले पाइल्स की बीमारी हुई थी। मैंने एक डॉक्टर से इसका इलाज कराया और मैं अब ठीक हूं। क्या मुझे दोबारा हो सकती है? इसे जड़ से खत्म कैसे करें?
- एक पाठक

समस्या दोबारा न हो, इसके लिए आप अपने खानपान की आदतों को सुधारें। मिर्च मसाले वाला खाना न खाएं। कब्ज न रहने दें और मल त्याग के वक्त ज्यादा जोर न लगाएं।

मेरा पेट गड़बड़ रहता है। गैस भी बनती है। एक बार में फ्रेश भी नहीं हो पाता। कुछ समय पहले खून भी आया था। कभी खून आता है कभी नहीं। क्या ये पाइल्स हैं?
- मनीष

पाइल्स हो सकते हैं। जांच कराएं।

पाइल्स के लिए मेरा तीन बार ऑपरेशन हो चुका है। मल त्याग के वक्त बैठते हुए मुझे बड़ा दर्द होता है।
- ओमप्रकाश सैनी

आमतौर पर ऐसा होता नहीं है कि किसी का पाइल्स के लिए तीन बार ऑपरेशन हो। आपको किसी सीनियर सर्जन से मिलकर जांच करानी चाहिए कि कहीं कोई और बीमारी तो नहीं है।

छह महीने पहले मैने पाइल्स के लिए लेसर गन ऑपरेशन कराया था, लेकिन अब कुछ समय से मुझे ऑपरेशन की जगह पर खुजली होती है। क्या करूं?
आपके बारे में कुछ भी कहने से पहले कुछ और सूचनाएं जानना जरूरी है, मसलन क्या आपको कोई डिस्चार्ज भी होता है? डॉक्टर से दोबारा जांच कराएं और तब तक एंटी एलजिर्क दवा ले सकते हैं।

मेरी उम्र 33 साल है। मल त्याग के बाद हल्का सा मांस जैसा बाहर आ जाता है, जो अंदर भी चला जाता है। इसमें कोई दर्द, खुजली या खून नहीं आता और भी कोई दिक्कत नहीं है। क्या यह पाइल्स हैं?
अगर मांस छोटा है तो पाइल्स हो सकते हैं। अगर बड़ा आता है, तो रेक्टल प्रोलैप्स की आशंका भी हो सकती है। आपको डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।

क्या होते हैं पाइल्स
बवासीर या पाइल्स को मेडिकल भाषा में हेमरॉइड्स के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुदा (ऐनस) के अंदरूनी और बाहरी क्षेत्र और मलाशय (रेक्टम) के निचले हिस्से की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से ऐनस के अंदर और बाहर या किसी एक जगह मस्से जैसी स्थिति बन जाती है, जो कभी अंदर रहते हैं और कभी बाहर भी आ जाते हैं। करीब 70 फीसदी लोगों को अपने जीवन में किसी न किसी वक्त पाइल्स की समस्या रही है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ पाइल्स की समस्या बढ़ सकती है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है तो इसके होने की आशंका बढ़ जाती है। आनुवांशिक समस्या है।

फिशर: आमतौर पर गुदा से संबधित सभी रोगों को बवासीर या पाइल्स ही समझ लिया जाता है, लेकिन इसमें कई और रोग भी हो सकते हैं। हो सकता है, जिन्हें आप पाइल्स समझ रहे हैं, वे फिशर हों। कई बार एनल कैनाल के आसपास के क्षेत्र में एक क्रैक जैसी स्थिति बन जाती है, जिसे फिशर कहते हैं। यह क्रैक छोटे भी हो सकते हैं और इतने बड़े भी कि इनसे खून आने लगे।


लक्षण
आमतौर पर पाइल्स बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होते और तीन-चार दिन में अपने आप ही ठीक हो जाते हैं। कई बार तो लोगों को पता भी नहीं चलता कि उन्हें पाइल्स हैं। वैसे पाइल्स के यह लक्षण हो सकते हैं:-
-ऐनस के इर्द-गिर्द एक कठोर गांठ जैसी महसूस हो सकती है। इसमें ब्लड हो सकता है, जिसकी वजह से इनमें काफी दर्द होता है।
-टॉयलेट के बाद भी ऐसा महसूस होना कि पेट साफ नहीं हुआ है।
- मल त्याग के वक्त लाल चमकदार रक्त का आना।
- मल त्याग के वक्त म्यूकस का आना और दर्द का अहसास होना।
- ऐनस के आसपास खुजली होना और उस क्षेत्र का लाल और सूजन आ जाना।

पाइल्स के प्रकार
अंदरूनी-
स्टेज 1:
शुरुआती स्थिति में ऐनस के भीतर छोटी-सी सूजन जैसी होती है। आमतौर पर यह दिखाई भी नहीं देती। इनमें दर्द नहीं होता। बस मरीज मल त्याग के वक्त या जोर लगाने पर खून आने की शिकायत करता है।
स्टेज 2: पहली स्थिति से ज्यादा सूजन होती है। मल त्याग के वक्त जोर लगाने पर खून के साथ मस्से बाहर आ जाते हैं, लेकिन हाथ से अंदर करने पर वापस चले जाते हैं।
स्टेज 3: तीसरी तरह की स्थिति गंभीर होती है। इसमें सूजन वाला हिस्सा या मस्सा बाहर की ओर लटका रहता है और उसे उंगली की मदद से भी अंदर नहीं किया जा सकता। यह बड़े होते हैं और हमेशा बाहर की ओर निकले रहते हैं। अंदरूनी पाइल्स को ही खूनी बवासीर कहा जाता है। सेकंड या थर्ड स्टेज पाइल्स में कोई भी तेल लगाकर शौच के बाद मस्सों को अंदर कर दें। बाहर रहने से इंफेक्शन का डर रहता है।

बाहरी-
इसे मेडिकल भाषा में पेरिएनल हेमाटोमा कहा जाता है। यह छोटी-छोटी गांठें या सूजन जैसे होते हैं, जो ऐनस की बाहरी परत पर स्थित होते हैं। इनमें बहुत ज्यादा खुजली होती है। अगर इनमें रक्त भी जमा हो जाए तो दर्द होता है और तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

वजहें
लगातार रहने वाली और पुरानी कब्ज और मल त्याग में ज्यादा जोर लगाना।
गुदा मैथुन।
लगातार और बार-बार होने वाला डायरिया।
ज्यादा वजन लगातार उठाना।
मोटापा।
प्रेग्नेंसी में भी कई बार पाइल्स की समस्या हो जाती है।

यह भी ध्यान रखें-
कब्ज पाइल्स की
सबसे प्रमुख वजह है। इससे बचने के लिए भरपूर हरी और रेशेदार सब्जियां खाएं, ताजे फल खाएं और खूब पानी पिएं। इससे मल सॉफ्ट होगा जिससे जोर नहीं लगाना पड़गा।
सॉफ्ट और नमी वाले टॉयलेट पेपर का प्रयोग करें और पोंछने की बजाय पेपर से थपथपाएं।
ढीले अंडरवेयर पहनें। टाइट अंडरवेयर की वजह से पाइल्स पर रगड़ आ सकती है, जिससे दिक्कत होगी।
पाइल्स के मरीज को मल त्याग के बाद भी ऐसा लगता रहता है जैसे अभी और मल आना बाकी है। इसके लिए वे जोर लगाते हैं, जो नुकसानदायक हो सकता है। मल और आने की सेंसेशन उन्हें पाइल्स की वजह से ही होती है, जबकि असल में पेट साफ हो चुका होता है। जोर लगाने से बचें।
कोशिश करें, टॉयलेट में एक से डेढ़ मिनट के भीतर फारिग होकर आ जाएं।
टॉयलेट में बैठकर पेपर या कोई किताब न पढ़ें।


इलाज के तरीके
ऐलोपैथी

ऐलोपैथी में इलाज के मोटे तौर पर तीन तरीके हैं:
1. दवाओं से:
अगर पाइल्स ग्रेड 1 या ग्रेड 2 के हैं यानी आकार में छोटे हैं तो दवाओं से उन्हें ठीक किया जा सकता है। खाने और लगाने दोनों की ही दवाएं दी जाती हैं। पाइल्स की शुरुआती स्टेज में इसी तरीके से इलाज हो जाता है।

एनोवेट (Anovate), प्रॉक्टोसिडिल (Proctosedyl), फकटू (Faktu) पाइल्स पर लगाने की दवाएं हैं। इनमें से किसी एक दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं। दवा को दिन में तीन बार लगाएं। अगर अंदरूनी पाइल्स है तो ट्यूब के साथ दिए गए ऐप्लिकेटर या उंगली की मदद से दवा लगाएं और हर बार दवा लगाने के बाद ऐप्लिकेटर को धो लें। इन दवाओं का लम्बे समय तक इस्तेमाल न करें। कोई भी दवा डॉक्टर से सलाह के बाद ही यूज करें।

इसमें खुजली होती है। खुजाने से मर्ज बढ़ जाता है। ऐसे में ऊपर बताई गई किसी एक क्रीम का इस्तेमाल करें।

2. अस्पताल में भर्ती हुए बिना इलाज:
अगर दवाओं से पाइल्स ठीक नहीं हो रहे हैं तो यह तरीके अपनाए जाते हैं। इसमें दो तकनीक चलन में हैं।

एंडोस्कोपिक स्केलरोथेरपी या इंजेक्शन थेरपी: इसमें मरीज को एक इंजेक्शन दिया जाता है। इससे मस्से सिकुड़ जाते हैं और ठीक हो जाते हैं। यह डे केयर प्रोसेस है। अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। एक बार इंजेक्शन देने से कुछ मस्से ठीक हो जाते हैं। महीने भर के बाद मरीज को दोबारा बुलाया जा सकता है और फिर उसे इंजेक्शन दिया जाता है। कितनी बार बुलाकर इंजेक्शन दिया जाएगा, यह पूरी तरह मरीज की दशा पर निर्भर करेगा। यह तरीका भी ग्रेड 1 या ग्रेड 2 के पाइल्स में ही अपनाया जाता है।
खर्च: एक बार इंजेक्शन देने के प्रोसेस का खर्च करीब तीन हजार रुपये आता है।

रबर बैंड लीगेशन: इस प्रक्रिया में पाइल्स की जड़ों में बैंड लगाया जाता है। यह बैंड खून के संचरण को रोक देता है और मस्से सूख जाते हैं। कोई एनस्थीजिया नहीं दिया जाता। डे केयर प्रोसेस है। एक बार बैंडिंग करने से कुछ पाइल्स ठीक हो जाते हैं। अगर ठीक नहीं होते तो मरीज को दोबारा बुलाया जा सकता है। मरीज की कंडिशन के आधार पर उसे दो बार से ज्यादा भी इस प्रक्रिया को कराना पड़ सकता है।
खर्च: इसमें भी एक बार का खर्च तीन हजार रुपये के करीब ही बैठता है।

3. सर्जरी
सर्जरी में भी आजकल दो तरीके अपनाए जा रहे हैं।

हेमरॉयडेक्टमी: मस्से बहुत बड़े आकार के हैं और इलाज के दूसरे तरीके फेल हो चुके हैं तो परंपरागत तरीके से ओपन सर्जरी की जाती है, जिसमें अंदरूनी या बाहरी मस्सों को सर्जरी के जरिए काटकर निकालना पड़ता है। इस प्रक्रिया को हेमरॉयडेक्टमी कहते हैं। जनरल एनैस्थीजिया देकर सर्जरी की जाती है। सर्जरी के बाद इसमें मरीज को काफी दर्द का अनुभव होता है और रिकवर होने में भी थोड़ा ज्यादा वक्त लग जाता है।

एमआईपीएच: इस तरीके में मरीज को दर्द कम होता है, खून कम होता है और उसकी रिकवरी जल्दी हो जाती है। इसके अलावा इंफेक्शन के चांस भी कम होते हैं। इसे करने में 30 से 40 मिनट का वक्त लगता है। एनैस्थीजिया दिया जाता है। यह लोकल, रीजनल या जनरल भी हो सकता है। इस तरीके को स्टेपलर हेमरॉयडेक्टमी या स्टेपलर पाइल्स सर्जरी भी कहते हैं। इस में भी एक से दो दिन रुकना पड़ता है।

होम्योपैथी
होम्योपैथी में पाइल्स का बहुत अच्छा इलाज है और मरीज अगर दो से तीन महीने लगातार इलाज करा ले तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। होम्योपैथी में माना जाता है कि पाइल्स के सिर्फ 10 फीसदी मामलों में ही सर्जरी की जरूरत होती है। बाकी स्थितियों को दवा से ठीक किया जा सकता है। स्थिति के अनुसार नीचे दी गई दवाओं को अपने डॉक्टर की सलाह से लिया जा सकता है:-
-अगर पाइल्स से खून नहीं आता। ऐसे पाइल्स अंदर भी हो सकते हैं और बाहर भी। ऐसी स्थिति में इनमें से किसी एक दवा की चार-चार गोली दिन में तीन बार ले सकते हैं।
एंटिम क्रूड 30 (Antim Crude), एसकुलस 30 (Aesculous), एलोस 30 (Aloes)।
- अगर पाइल्स से खून आता है।
हैमेमेलिस 30 (Hamamelis), मिलेफोलियम 30 (Millefolium), फॉस्फोरस 30 (Phosphorous)
- अगर पाइल्स में दर्द ज्यादा है।
रैटेनिया 30 (Ratanhia), पेकोनिया 30 (Paconia)
- प्रेग्नेंसी में अगर पाइल्स हैं।
कोलिन सोनिया (Colin Sonia), पल्सैटिला (Pulsatilla), सीपिया (Sepia)

आयुर्वेद
आयुर्वेद में मोटे तौर पर दो तरह से इलाज किया जाता है।

दवाओं से इलाज
अगर स्टेज 1 के पाइल्स हैं तो मरीज को पेट साफ करने की और मस्सों पर लगाने की दवाएं दी जाती हैं, सिकाई बताई जाती है और खानपान ठीक करने को कहा जाता है। इसी से यह समस्या ठीक हो जाती है। नीचे दी गई दवाओं में से कोई एक ली जा सकती है।

- पंचसकार चूर्ण या सुश्रुत चूर्ण एक चम्मच रात को गर्म दूध या गर्म पानी से रोजाना लें।
- अशोर्घिनी वटी की दो गोली सुबह-शाम खाने के बाद पानी से लें।
- खाने के बाद अभयारिष्ट या कुमारी आसव चार-चार चम्मच आधा कप पानी में मिलाकर लें।
- मस्सों पर लगाने के लिए सुश्रुत तेल आता है। इसका प्रयोग कर सकते हैं।
- प्रोटोस्कोप के जरिये डॉक्टर क्षार का एक लेप लगाते हैं, जिससे मस्से सूख जाते हैं।
- त्रिफला, इसबगोल भी सोते वक्त लिए जा सकते हैं।
- दर्द बढ़ जाए तो एक टब गर्म पानी में एक चुटकी पौटेशियम परमैंग्नेट डालकर सिकाई करें। यह सिकाई हर मल त्याग के बाद करें। पाइल्स कैसे भी हों, अगर सूजन और दर्द है तो गर्म पानी की सिकाई करनी चाहिए।

2. क्षारसूत्र चिकित्सा
- स्टेज 2 और 3 के पाइल्स हैं तो आयुर्वेद में सबसे ज्यादा प्रभावशाली पद्धति क्षारसूत्र चिकित्सा अपनाई जाती है।
- इस तरीके में एक मेडिकेटेड धागे का उपयोग किया जाता है, जिसे क्षारसूत्र कहते हैं। इस धागे को एक खास तरीके से कुछ आयुर्वेदिक दवाओं से बनाया जाता है।
- क्षारसूत्र चिकित्सा करने के लिए डॉक्टर पहले पाइल्स के मस्सों को प्रोटोस्कोप नाम के यंत्र से देखते हैं और उसके बाद मस्सों की जड़ में इस धागे को लीगेट कर देते हैं।
- मस्सों की जड़ों में एक जगह ऐसी होती है, जहां दर्द नहीं होता। इस जगह पर ही इस क्षारसूत्र को लीगेट किया जाता है।
- मस्सों को अंदर कर दिया जाता है और धागा बाहर की ओर लटकता रहता है।- इस पूरे प्रोसेस को करने के बाद मरीज को घर भेज दिया जाता है।
- पूरी तरह ठीक होने में दो हफ्ते का वक्त लगता है।
- इस दौरान इस धागे के जरिये दवाएं इंजेक्ट होती रहती हैं और मस्सों को सुखाकर गिरा देती हैं। मस्से गिरने के साथ ही धागा भी अपने आप गिर जाता है।
- इन दो हफ्तों के दौरान डॉक्टर मरीज को एक-दो बार देखने के लिए बुलाते हैं और यह आकलन करते हैं कि प्रक्रिया ठीक चल रही है और कितना फायदा हो रहा है।
- इन दो हफ्तों के दौरान मरीज को कुछ दवाओं का सेवन करने के लिए कहा जाता है और ऐसी चीजें ज्यादा खाने की सलाह दी जाती है, जो कब्ज दूर करने में सहायक हों। गर्म पानी की सिकाई और कुछ व्यायाम भी बताए जाते हैं।
- क्षारसूत्र चिकित्सा के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। उसी दिन मरीज को घर भेज दिया जाता है।
- लोकल एनैस्थिसिया के तहत यह प्रकिया की जाती है।
- इस तरीके से इलाज के बाद पाइल्स के दोबारा होने की आशंका खत्म हो जाती है।
- खर्च: 5 से 10 हजार रुपये के बीच आता है।

ध्यान रहे-
- पाइल्स के मस्सों में बस खून आता है, दर्द नहीं होता। जिन लोगों को दर्द महसूस होता है, उसकी वजह पाइल्स में हुआ इंफेक्शन है। ऐसे मरीजों के इंफेक्शन को पहले दवाओं से ठीक किया जाता है और उसके बाद ही उनकी क्षारसूत्र चिकित्सा की जाती है।
- इस क्षेत्र में कई झोलाछाप डॉक्टर भी इलाज करते हैं और बड़े-बड़े दावे करते हैं। आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज के लिए ऐसे डॉक्टरों के पास ही जाएं जिनके पास सही डिग्री है। क्षारसूत्र चिकित्सा उन्हीं डॉक्टरों से कराएं जिनके पास एमएस (आयुर्वेद) या एमडी (शल्य चिकित्सा) की डिग्री हो।

योग
- अगर इन योग क्रियाओं को नियम से किया जाए तो पाइल्स होंगे ही नहीं:
कपालभाति, अग्निसार क्रिया, पवनमुक्तासन, मंडूकासन, अश्विनी मुदा। शंख प्रक्षालन क्रिया भी कब्ज दूर करने सहायक है, इसलिए तीन-चार महीने में एक बार इस क्रिया को करने से कब्ज नहीं होती और पाइल्स की समस्या नहीं होती।
- अगर पाइल्स हैं तो गणेश क्रिया की जा सकती है। कोई भी योगिक क्रिया किसी योग्य योग गुरु से सीखकर ही करें।

डाइट-
पाइल्स में यह जानना ज्यादा जरूरी है कि क्या न खाएं।
क्या न खाएं
- नॉन वेज।
- मिर्च मसाले वाला खाना।
- केक पेस्ट्री और मैदे से बनी चीजें।
- जंक फूड और तैलीय खाना।
- चाय कॉफी-अल्कोहल और बीयर।

क्या खाएं
- पपीता, चीकू, अंजीर, केला, नाशपाती, अंगूर, सेब जैसे फल।
- सलाद जैसे गाजर मूली आदि।
- हरी पत्तेदार सब्जियां।
- चोकर वाला आटा, मल्टिग्रेन ब्रेड।
- दूध, फलों के जूस और बटर मिल्क जैसे दूसरे लिक्विड।
- दिन में आठ गिलास पानी

मिथ्स और फैक्ट्स
1. पाइल्स बेहतर हो सकते हैं, पूरे ठीक नहीं

कभी-कभार पाइल्स दोबारा हो जाने की वजह से ऐसा माना जाता है कि इनका पूरा इलाज संभव नहीं है, लेकिन यह गलत है। आजकल कई ऐसी तकनीक आ चुकी हैं, जिनकी मदद से पाइल्स का पूरा इलाज किया जा सकता है और इसे जड़ से खतम किया जा सकता है।
2. इलाज लंबा है और दर्दनाक है
ओपन सर्जरी के मामले में यह बात ठीक हो सकती है, लेकिन अब कई और तरीके भी मौजूद हैं, जिनमें दर्द या परेशानी नहीं होती और इलाज भी लंबा नहीं खिंचता। कई तरीकों में तो अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं होती।
3. पाइल्स से हमेशा खून आता है
सभी मरीजों को खून आना जरूरी नहीं है। पाइल्स कठोर मस्से होते हैं, जो ऐनस से बाहर आ जाते हैं। धीरे धीरे यह साइज में बढ़ते जाते हैं और जटिलताएं पैदा करते हैं। हर पाइल्स में खून आएगा ही, यह जरूरी नहीं है।
4. पाइल्स से कैंसर हो सकता है
पाइल्स होने से कैंसर होने का खतरा नहीं बढ़ता, लेकिन यह भी समझना होगा कि रेक्टल कैंसर और पाइल्स के लक्षण एक जैसे होते हैं। इसलिए डॉक्टर से सलाह करके यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि असली बीमारी है क्या।
5. पाइल्स टैबू है
दूसरे रोगों की तरह पाइल्स भी एक रोग है। कई बार लोग इसे टैबू मानकर झोलाछाप डॉक्टरों के फेर में फंस जाते हैं और पैसा व समय बर्बाद करते रहते हैं। अगर ऐसी परेशानी है तो झिझक छोड़कर फौरन किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह करें।

कुछ अच्छे ऐप्स
पाइल्स और उसके इलाज के बारे में और ज्यादा विस्तृत जानकारी चाहिए तो आप इन ऐप की मदद ले सकते हैं।

1. PILES
ओएस: एंड्रॉयड
कीमत: फ्री

2. STOP YOUR HEMORRHOLD CONDITION
ओएस: एंड्रॉयड
कीमत: फ्री

3. WHAT CAUSES HEMORRHOLDS
ओएस: एंड्रॉयड
कीमत: फ्री

कुछ यूजफुल वेबसाइट्स
- webmd.com/a-to-z-guides/hemorrhoids-topic-overview
- medicinenet.com/hemorrhoids/article.htm
- bbc.co.uk/health/physical_health/conditions/haemorrhoids1.shtml


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बवासीर या हैमरॉइड से अधिकतर लोग पीड़ित रहते हैं। इस बीमारी के होने का प्रमुख कारण अनियमित दिनचर्या और खान-पान है। बवासीर में होने वाला दर्द असहनीय होता है। बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है। बवासीर दो तरह की होती है, अंदरूनी और बाहरी। अंदरूनी बवासीर में नसों की सूजन दिखती नहीं पर महसूस होती है, जबकि बाहरी बवासीर में यह सूजन गुदा के बिलकुल बाहर दिखती है।
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बवासीर को पहचानना बहुत ही आसान है। मलत्याग के समय मलाशय में अत्यधिक पीड़ा और इसके बाद रक्तस्राव, खुजली इसका लक्षण है। इसके कारण गुदे में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक औषधियों को अपनाकर बवासीर से छुटकारा पाया जा सकता है।

नींबू

डेढ़-दो कागजी नींबू अनिमा के साधन से गुदा में लें। 10-15 मिनट के अंतराल के बाद थोड़ी देर में इसे लेते रहिए उसके बाद शौच जायें। यह प्रयोग 4-5 दिन में एक बार करें। इसे 3 बार प्रयोग करने से बवासीर में लाभ होता है।

जीरा

करीब दो लीटर मट्ठा लेकर उसमे 50 ग्राम पिसा हुआ जीरा और थोडा नमक मिला दें। जब भी प्यास लगे तब पानी की जगह यह छाछ पियें। चार दिन तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्‍से ठीक हो जाते है। या आधा चम्‍मच जीरा पावडर को एक गिलास पानी में डाल कर पियें।

जामुन

जामुन की गुठली और आम की गुठली के अंदर का भाग सुखाकर इसको मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में हल्के गर्म पानी या छाछ के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

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इसबगोल

इसबगोल भूसी का प्रयोग करने से से अनियमित और कड़े मल से राहत मिलती है। इससे कुछ हद तक पेट भी साफ रहता है और मस्‍सा ज्‍यादा दर्द भी नही करता।

बड़ी इलायची

बड़ी इलायची भी बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्‍छा उपचार है। इसे सेवन करने के लिए लगभग 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर रखकर भूनते हुए जला लीजिए। ठंडी होने के बाद इस इलायची को पीस लीजिए। रोज सुबह इस चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर ठीक हो जाता है।


किशमिश

रात को 100 ग्राम किशमिश पानी में भिगों दें और इसे सुबह के समय में इसे उसी पानी में इसे मसल दें। इस पानी को रोजाना सेवन करने से कुछ ही दिनों में बवासीर रोग ठीक हो जाता है।

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अन्‍य उपाय

चौथाई चम्मच दालचीनी चूर्ण एक चम्मच शहद में मिलाकर प्रतिदिन एक बार लेना चाहिए। इससे बवासीर नष्ट हो जाती है। हरड या बाल हरड का प्रतिदिन सेवन करने से आराम मिलता है। अर्श (बवासीर) पर अरंडी का तेल लगाने से फायदा होता है। साथ ही नीम का तेल मस्सों पर लगाइए और इस तेल की 4-5 बूंद रोज पीने से बवासीर में लाभ होता है। आराम पहुंचानेवाली क्रीम, मरहम, वगैरह का प्रयोग आपको पीड़ा और खुजली से आराम दिला सकते हैं।
  
इन औषधियों के प्रयोग के अलावा अपनी आंतों की गतिविधियों को सामान्‍य रखने के लिये, फल, सब्ज़ियां, ब्राउन राईस, ब्राउन ब्रेड जैसे रेशेयुक्त आहार का सेवन कीजिए। ज्‍यादा मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन कीजिए।

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