Sunday, December 7, 2014

Emerging China is biggest challenge to India

 चीन के बढ़ते ग्‍लोबल प्रभाव से भारत को मिलेगी चुनौती
 चीन के बढ़ते ग्‍लोबल प्रभाव से भारत को मिलेगी चुनौती
Cīna kē baṛhatē g‍lōbala prabhāva sē bhārata kō milēgī cunautī
印度将挑战中国日益增长的全球影响力


चीन का बाजार धीरे-धीरे दुनिया में फैलता जा रहा है। अमेरिका से लेकर दुनिया के कई देशों में चीन में बना सामान प्रयोग किया जाता है। भारत भी इसमें शामिल है। चीन के इस बढ़ते प्रभुत्‍व को लेकर मीडिया में भी जोर-शोर से चर्चा हो रही है। फाइनेंशियल टाइम्स ने भी इसकी घोषणा की है कि मौजूदा साल 2014 में अमेरिका को पीछे छोड़कर चीन, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा। हालांकि, जिन आधारों पर यह घोषणा की गई है उन पर सवालिया निशान लगाए जा सकते हैं। फिर भी चीन के इस तरह बढ़ते जाने का दुनिया  के लिए और खासतौर पर भारत के लिए बहुत महत्व है। क्‍योंकि भारत को चीन के इस बढ़ते प्रभुत्‍व से विश्‍व स्‍तर पर अपनी भूमिका को लेकर सक्रियता से साेचना पड़ेगा। अभी भारत की सारी कूटनीतिक ताकत अपने घरेलू मुद्दों का निपटान करने में चली जाती है। लेकिन अब उसे अपनी सारी ताकत और क्षमता का इस्‍तेमाल विदेशों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने की दिशा में लगाने के बारे में सोचना होगा। 
 
इस तथ्य से सामना करने की चुनौती हाल में भारत की सत्‍ता पर काबिज हुई नई सरकार की प्राथमिकताओं में भी शामिल होगी। यह अनुमान खरीद क्षमता के आधार पर लगाया गया है। मसलन, एक अमेरिकी डॉलर 6.25 चीनी येन औैर 60.16 भारतीय रुपए के बराबर है। बेशक, 60 रुपए भारत में आपको जो दे सकते हैं वह उससे ज्यादा होगा, जो न्यूयॉर्क में एक डॉलर आपको दे सकता है। इसी खरीद क्षमता के आधार पर पिछले साल भारत ने जापान को वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में पीछे छोड़ दिया था। भारत का जीडीपी अब 5.07 खरब डॉलर है तो जापान का 4.7 खरब डॉलर। इसके मुताबिक अमेरिका 16.8 खरब डॉलर के साथ शीर्ष पर तो चीन 13.4 खरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है।

यदि आप विनिमय दर के अनुसार जीडीपी की गणना करें तो दूसरा ही चित्र उभरता है। इसमें अमेरिका व चीन तो अपने स्थान पर जमे रहते हैं पर भारत 10वें स्थान पर खिसक जाता है। फाइनेंशियल टाइम्स का कहना है कि आईएमएफ की उम्मीद के मुताबिक चीन 2011 से 2014 के बीच 24 फीसदी की वृद्धि देखेगा जबकि इसी दौरान अमेरिका की आर्थिक वृद्धि सिर्फ 7.2 फीसदी होगी। हालांकि, दूसरी दृष्टि से देखें तो चीन नंबर वन और भारत नंबर तीन अर्थव्यवस्था होने के बाद भी न तो दुनिया में प्रदूषण रोकने के लिए कुछ कर रहे हैं, न अपने देशवासियों को मकान दे पा रहे हैं, न उन्हें सूदखोरों से बचा पा रहे हैं। चीन और भारत में बड़ी आबादी गरीबों की रह रही है।
 
प्रति व्यक्ति जीडीपी के हिसाब से चीन 93वें नंबर पर और भारत 133वें स्थान पर है। चीन कई आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है पर 7.5 फीसदी की आर्थिक वृद्धि  का जुनून उस पर ऐसा चढ़ा है कि वह निर्यात पर गैर-जरूरी निर्भरता की ओर ध्यान देकर आर्थिक सुधार करने को राजी ही नहीं है। प्रदूषण को कम करने के लिए भी कुछ नहीं कर रहा। अमेरिका की नाकामी की दुनिया को भारी कीमत चुकानी होगी। बेशक, अमेरिका भी कई देशों को धमकाता रहा है और भारत को इसका काफी अनुभव है पर चीन की तुलना में उसकी नीतियों में खुलापन और उदारता है। अभी हम चीन के नेतृत्व वाली  दुनिया की दहलीज पर नहीं पहुंचे हैं पर दुनिया बदल रही है।
 
China's market is gradually being transmitted to the world. In many countries of the world, from America used goods made in China. India is also involved. The growing dominance of China in the media has been heavily discussed. The Financial Times has also announced that the current year to the US ahead of China in 2014, will be the world's largest economy. However, on the grounds that it was declared a question mark can be placed on them. Yet China's growing in the world and is especially important for India. The growing dominance of China in India for his role on the world stage will actively Saecna. Right now all the diplomatic clout of India leaves his home in the settlement of issues. But now he used all his strength and capacity abroad, putting his talents towards iron conviction would think.

India to face the fact that the recent ruling of the challenge was to be included in the new government's priorities. This estimate is based only on the potential purchase. For example, one US dollar is equal to 6.25 Chinese Yuan Indian Rupees 60.16 inferred. Of course, 60 rupees in India who can give you more than it will give you a dollar in New York. Last year, India on the basis of purchasing power, Japan was left behind in the global economic rankings. India's GDP is now at $ 5.07 trillion to $ 4.7 trillion in Japan. According to the US on top with $ 16.8 billion, China is in second place with $ 13.4 trillion.

If you calculate the exchange rate of GDP per second picture emerges. The US and China are then frozen in place, India has slipped to 10th place. According to the Financial Times that the IMF expects China will rise 24 per cent between 2011 and 2014, the US economy grew just 7.2 per cent during the same period. However, the second point of view, the Chinese economy is the number one and number three after India not doing anything to prevent pollution in the world, are not able to give his countrymen house, nor are they able to save Sudkhoron . China and India have large populations living of the poor.

No. 93 in terms of GDP per capita in China and India is ranked 133. China is facing many economic problems of economic growth of 7.5 per cent on the passion that he has gained such reliance on exports by paying attention to the non-essential to the economic recovery is not persuaded. Doing nothing to reduce pollution. Will pay a heavy price for the failure of the US to the world. Of course, many countries threatens US and India than China on its considerable experience in the policies of openness and generosity. Right now we have not reached the threshold of China led the world is changing the world.
 
中国市场正逐渐被传递到世界各地。世界许多国家,地区使用中国制造的商品。印度也参与其中。中国媒体不断增长的主导地位已经严重讨论金融时报还宣布,本年度美国领先于中国,2014年将成为世界最大的经济体但是,被宣布问号理由可以放在他们。然而,中国的增长在世界上,是印度尤为重要中国在印度不断增长的主导地位,他在世界舞台将积极Saecna作用现在,印度的所有外交影响力离开他的家问题的解决但是,现在他用他所有的力量和能力在国外自己的才华的信念想。

印度面对的事实是,挑战近期裁决是要包含在新政府的优先事项这个估计只基于潜在的购买例如,1美元等于6.25中国人民币印度卢比60.16推断。当然60卢比在印度谁可以给你比它会给你在纽约一美元去年,印度的购买力的基础上日本全球经济排名中掉队。印度的GDP现在50700亿美元至47万亿美元的日本据美国顶部美元16.8十亿中国是134000亿美元第二位。

如果你计算每秒画面GDP汇率出现了。美国和中国那么到位冻结印度已经下滑到第10位据金融时报说,IMF预计中国将增长24%,2011年和2014年之间美国经济在同一时期仅增长了7.2%然而,第二种观点中国经济的头号第三,仅次于印度没有做任何事情,以防止污染的世界,能够给他的同胞的房子也不是能够节省Sudkhoron 中国和印度生活贫困人口众多

在中国和印度的人均国民生产总值93排名133中国正面临着7.5,他已经关注非必要的经济复苏是不是说服上涨对出口的依赖,这样的激情经济增长百分之许多经济问题什么都不做,以减少污染将为此付出沉重的代价,美国未能世界当然许多国家威胁美国和印度比中国开放和宽容政策,相当丰富的经验现在,我们还没有达到中国的门槛导致世界正在改变世界
 

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